एशिया का सबसे बड़ा सोलर प्लांट बारिश से हुआ तबाह

रीवा@न्यूज़:-लगातार बारिश से एशिया के सबसे बड़े सौर ऊर्जा प्लांट को भारी नुकसान हुआ है। पहाड़ों से बारिश का पानी तेज रफ्तार से आने की वजह से यूनिट नंबर-तीन की ढाई सौ से अधिक सौर प्लेटें बह गईं। पानी के तेज बहाव से सोलर पैनल, इन्वर्टर, केबल व ट्रांसफार्मर पैनल को भी भारी क्षति पहुंची है।

इसकी वजह से यह यूनिट (150 मेगावाट) पूरी तरह से बंद हो गई है। इसी यूनिट से दिल्ली मेट्रो को बिजली सप्लाई की जाती है। सौर ऊर्जा प्लांट में तीन यूनिट हैं। दो यूनिट अभी काम कर रही हैं। उत्पादन को शुरू करने अब नवीन ऊर्जा विभाग के अधिकारियों ने मुंबई और चीन से इंजीनियर बुलाने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए केंद्रीय नवीन ऊर्जा विभाग से पत्राचार शुरू किया गया है।
सोलर पावर प्लांट से जुड़े लोगों ने बताया कि रविवार रात अचानक पहाड़ से पानी बढ़ने के कारण यूनिट-तीन में लगाई गईं सौर ऊर्जा प्लेटें बारिश के पानी की धारा में फंसने से उखड़ गईं। नवीन ऊर्जा विभाग के कार्यपालन यंत्री एसएस गौतम ने बताया कि फिलहाल यूनिट नंबर तीन में करीब आठ से दस करोड़ के नुकसान का आंकलन हुआ है। यूनिट चलते समय बंद हुई है। इंजीनियर्स के आने के बाद ही और नुकसान का सही अनुमान लगाया जा सकेगा।
इसलिए बनी ऐसी स्थिति
अल्ट्रा मेगा सोलर पॉवर प्रोजेक्ट में रविवार रात अचानक पानी बढ़ने के पीछे मुख्य कारण यह है कि पहाड़ पर करीब 125 मिमी बारिश हो गई थी। इसके कारण पहले से पानी का बहाव पुराने झरनों से होने के बजाय कुछ नए झरनों का निर्माण हो गया। इससे कई स्रोतों से बदवार स्थित नाले में पानी का भराव हो गया। यही पानी सौर ऊर्जा प्लांट में जा पहुंचा। यही वजह है कि प्लांट को भारी नुकसान हुआ है।
बह गई तीन किलोमीटर की सड़क
अचानक पानी के बहाव के कारण सौर ऊर्जा प्लांट के भीतर बनी तीन किलोमीटर की एप्रोच रोड भी बह गई है। इससे अब प्लांट में आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
कई दिनों तक प्रभावित रहेगा बिजली उत्पादन

जिस तरह से प्लांट में पानी भरा है, उससे कई दिनों तक बिजली उत्पादन प्रभावित रहेगा। पहले ही १५० मेगावॉट बिजली का उत्पादन ठप हो गया था लेकिन अब फिर से बारिश के कारण और नुकसान की आशंका है। सोमवार की सायं कंपनियों ने बिजली उत्पादन रोक दिया। बताया जा रहा है कि वल्र्ड बैंक के सहयोग से इकाइयां यह अल्ट्रा मेगावॉट सोलर पॉवर प्लांट संचालित हैं, इसलिए वहां की टीम निरीक्षण करेगी, इसके बाद ही यहां पर बिजली का उत्पादन प्रारंभ हो पाएगा। नुकसान कितने का हुआ अभी इसका आंकलन किया जा रहा है।

150 मेगावाट का नुकसान
यह प्लांट 750 मेगावाट की क्षमता का है। वर्तमान में इस प्लांट की तीन यूनिटों से 520 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। यूनिट नंबर तीन से 150 मेगावाट बिजली का उत्पादन होता था जो अब बंद हो गया है।

पहाड़ क्षेत्र में तेज बारिश कई दिनों से हो रही है। इससे प्लांट की दो इकाइयों को अधिक नुकसान पहुंचा है। कंपनियां आंकलन कर रही हैं, इसलिए जब तक रिपोर्ट नहीं आती कुछ कह पाना संभव नहीं है। एसएस गौतम, कार्यपालन यंत्री सौर ऊर्जा

रुक-रुककर हो रही बारिश
मंगलवार दोपहर हुई बारिश ने सौर ऊर्जा प्लांट की यूनिट को एक बार फिर जलमग्न कर दिया है। पानी निकासी को लेकर प्रबंधन लगातार डीजल पंप का सहारा ले रहा है। इतना ही नहीं, जेसीबी लगाकर नाले का चौड़ीकरण किया जा रहा है।9 नवंबर 2018 को प्लांट की टेस्टिंग हुई थी,12 अप्रैल 2019 को इस प्लांट से उत्पादन शुरू हुआ था
बारिश से यूनिट नंबर 3 में नुकसान हुआ है। उत्पादन पूरी तरह ठप हो गया है। अब तक हुए सर्वे में तकरीबन 8 से 10 करोड़ का नुकसान हुआ है। बाकी नुकसान का अनुमान इंजीनियरों के आने के बाद लगेगा। 
   एसएस गौतम, कार्यपालन यंत्री, नवीन सौर ऊर्जा 

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