अल्ट्रा ट्रेक सीमेंट फैक्ट्री की लापरवाही से एक युवा इंजीनियर की क्रेशर बेल्ट मे फसने से दर्दनाक मौत

रीवा@न्यूज़:-अल्ट्राटेक सीमेंट फैक्ट्री में इंजीनियर का शव मशीन के बेल्ट में लगभग 22 घंटे लटकता रहा। इस दौरान पुलिए एवं जिला प्रशासन के अधिकारी संवेदनहीन बने रहे। हालांकि बाद में घटना के दूसरे दिन शुक्रवार को दोपहर 12 बजे फैक्ट्री प्रबंधन एवं परिजनों के बीच सहमति बनी और 40 लाख रुपए मुआवजा एवं 20 हजार रुपए प्रतिमाह पत्नी को पेंशन देने के बाद परिजन मान गए। इसके बाद शव को नीचे उतारने की प्रक्रिया शुरू की कई। इसके बाद शव को पीएम के लिए संजय गांधी अस्पताल ले जाया गया। नौबस्ता चौकी अंतर्गत अल्ट्राटेक सीमेंट प्लांट में इंजीनियर शैलेंद्र द्विवेदी निवासी पतेरी (सगोनी) गुरुवार की दोपहर प्लांट के अंदर काम कर रहा था। उसी दौरान इंजीनियर अचानक मशीन के बेल्ट में फंस गया। इस हृदय विदारक हादसे में इंजीनियर की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। घटना के बाद से फैक्ट्री में शुरू हुआ बवाल दूसरे दिन भी जारी रहा। मुआवजा की मांग को लेकर परिजन सहित स्थानीय लोगों ने शव को नहीं उठने दिया।

रातभर चला बातचीत का दौर

घटना के बाद से इंजीनियर का शव मशीन के बेल्ट में लटका रहा। परिजन व यूनियन के नेता एक करोड़ का मुआवजा व अनुकंपा नियुक्ति की मांग कर रहे थे, लेकिन पार्टी प्रबंधन 30 लाख से अधिक का मुआवजा देने को तैयार नहीं था। मौके पर उपस्थित पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी, फैक्ट्री प्रबंधन व परिजनों के बीच कई बार बातचीत हुई।

विधायकों ने कराया समझौता

शुक्रवार की सुबह सेमरिया विधायक केपी त्रिपाठी और रामपुर बघेलान विधायक विक्रम सिंह फैक्ट्री पहुंचे और पुन: बातचीत शुरू हुई। इस बार यूनियन और फैक्ट्री प्रबंधन के बीच आम सहमति बनी। प्रबंधन पीडि़त परिवार को 40 लाख का मुआवजा व 20 हजार रुपए पत्नी को आजीवन पेंशन देने पर राजी हो गया। फलस्वरूप 22 घंटे बाद इंजीनियर का शव नीचे उतारा गया। उसे पोस्टमार्टम के लिए संजय गांधी अस्पताल भेज दिया गया है।

पूरे मामले की जांच कराई जाएगी और जो भी दोषी होंगे के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। वही भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृति रोकने के लिए भी कदम उठाए जाएंगे। प्रबंधन को भी चेतावनी दी गई है। विकास सिंह, एसडीएम रीवा

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