सवारी वाहनों मे ओवरलोडिंग का तमाशा जारी नाकाम साबित हुई अब तक जिले की पुलिस

रीवा@न्यूज़:- सुप्रीम कोर्ट के आदेश और राज्य शासन के निर्देश के बावजूद रीवा जिले में सवारी वाहनों को लेकर ओवरलोडिंग का जानलेवा खेल किसी भी कीमत में थमने को तैयार नहीं हैं। सवारी वाहनों की अनकंट्रोल ओवरलोडिंग को देखते हुए रीवा पुलिस की नाकामी अपने आप समझ में आ जाती है थानों की पुलिस के साथ साथ यातायात पुलिस ना जाने कितने तरह के अभियान चलाकर शासन की तिजोरी में राजस्व पहुंचाने का काम तो बराबर कर लेते हैं लेकिन सवारी वाहनों की ओवरलोडिंग को समाप्त करने या अंकुश लगाने जैसी सक्रियता पुलिस की जिले के अंदर आज तक देखने को नहीं मिली है यही वजह है कि आसपास के ग्रामीण इलाकों से प्रतिदिन सुबह से सवारी वाहनों के नाम पर जो ऑटो , टैक्सियां शहर में आती हैं उनमें ओवरलोडिंग का तमाशा बराबर देखने को मिलता है लोगों की जिंदगी दांव पर लगाकर टैक्सी और ऑटो चालक अधिक से अधिक पैसा कमाने के लिए ओवरलोडिंग को तरीके से अंजाम देने के आदी हो गए हैं सवारी वाहनों की ओवरलोडिंग यह बताती है की रीवा की पुलिस इस गंभीर समस्या का समाधान करने में पूरी तरह से असफल साबित हुई है। शहर की सड़कों पर बेखौफ सवारी वाहनों में अत्यधिक सवारी का नजारा रोज ही देखने को मिलता है शहर के विभिन्न स्थानों पर मौजूद रहने वाली पुलिस की नजर जब ओवरलोड सवारी वाहनों पर पड़ती है तो उसके खिलाफ सख्त कार्यवाही करने के बजाय संबंधित पुलिसकर्मी पैसों की वसूली करना ज्यादा मुनासिब समझता है। जहां एक ऑटो में 25 से 30 सवारी भरकर ऑटो चालक अधिक से अधिक लाभ कमाने का काम करते हैं वहीं एक टैक्सी में 30 से अधिक सवारियों को लाने और ले जाने का काम बड़े पैमाने पर किया जाता है। इसके बाद भी रीवा पुलिस के आला अधिकारी मीडिया के सामने यही कहते हैं की ओवरलोड वाहनों के खिलाफ ठोस कार्यवाही को प्रत्येक थाना क्षेत्र में अंजाम दिया जा रहा है जबकि जमीनी हकीकत आम जनता भी जानती है।
बस मालिकों से मैनेज रहती है पुलिस
सवारी वाहनों के ओवरलोडिंग के मामले में ऑटो और टैक्सी के साथ साथ बस चालको की मनमानी भी हमेशा देखने को मिलती है 60 सीटर बस मे 90 से 100 सवारी भरने का काम इत्मीनान के साथ रेवांचल बस स्टैंड और सरदार वल्लभभाई बस स्टैंड में बराबर किया जाता है इसी तरह से ग्रामीण इलाकों से शहर आने वाली बसों में भी अत्यधिक सवारी का नजारा हमेशा देखने को मिलता है मजेदार बात यह है की रीवा पुलिस बस मालिकों के खिलाफ कार्यवाही करने की हिम्मत नहीं दिखाती है और दूसरी तरफ बस मालिक संबंधित थाना की पुलिस को हमेशा मैनेज करके चलते हैं यही वजह है कि अक्सर ओवरलोडिंग के मामले में ऑटो टैक्सी के खिलाफ कार्यवाही होती हुई जरूर नजर आती है पर बसों के मामले में पुलिस किसी तरह का जोखिम मोल नहीं लेती है। यातायात पुलिस के बारे में बहुत ज्यादा बताने की जरूरत नहीं है क्योंकि शहर के विभिन्न स्थानों पर मौजूद रहने वाली यातायात पुलिस ओवरलोडिंग के नाम पर क्या-क्या कारनामे करती है यह सच्चाई जनता से भी छिपी नहीं है। बस मालिकों से बराबर नजराना मिलने के कारण रीवा के पुलिस बसों में होने वाली ओवरलोडिंग को किसी तरह की समस्या नहीं मानती है जबकि पन्ना सहित अन्य क्षेत्रों में ओवरलोडिंग बस के मामले में कई हृदय विदारक घटनाएं सामने आ चुकी हैं इसके बाद भी रीवा की पुलिस ने किसी तरह की सीख लेना जरूरी नहीं समझा है शायद रीवा की पुलिस को सवारी वाहनों की ओवरलोडिंग के मामले में किसी बड़े हादसे का इंतजार है उसके बाद ही जिला प्रशासन और पुलिस सवारी वाहनों में होने वाली ओवरलोडिंग को स्थाई रूप से रोकने के लिए सफल प्रयास करने बाबत सड़क पर मुस्तैद नजर आएंगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *