मूल काम छोड़कर रेत की ओर पुलिस का विशेष ध्यान पुलिस का मुस्कान कार्यक्रम हुआ फेल,कोतवाली क्षेत्र से सबसे ज्यादा गायब हुई लड़कियां

मध्यप्रदेश ब्यूरो कृष्ण कुमार गुप्ता
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सोनांचल रिपोर्टर,सीधी/सीधी-मप्र के सीधी जिले में पिछले एक वर्ष में जिले के 10 थानों के बीच एक सैकड़ा से ज्यादा महिलाएं गायब हो चुकी हैं। परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ भगाने या गुमशुदगी का मामला पंजीबद्ध कर लिया गया है, इन मामलों में जांच शुरू नहीं की गई।

बरामदगी के लिए दूसरे प्रदेश तो दूर, जिले के भीतर तक गायब हुई नाबालिग व महिलाओं की तलाश तक नहीं की जा रही। जिले में नाबालिग लड़कियों के लापता होने का सिलसिला जारी है। नया वर्ष प्रारंभ होते ही लड़कियों का गायब होना शुरू हो जाता है। वर्ष समाप्त होते-होते यह संख्या सैकड़ा पार हो जाती है।

आकड़े बयां करते हैं कि जिले में सबसे ज्यादा अपराध है तो वह महिलाओं से संबंधित है, किंतु पुलिस महिला अपराधोंं पर अंकुश लगाने या कोई विशेष कदम उठाने की जगह पर वारंटियों की गिरफ्तारी या फिर देसी शराब तक ही सिमटकर रह गई है। इंट्री वसूली में जरूर पुलिस की सक्रियता देखने को मिलती है, किंतु महिला अपराधों की रोकथाम की दिशा में कदम नहीं उठाया जा रहा है।

मूल काम छोड़कर रेत की ओर पुलिस का विशेष ध्यान

पुलिस का मूल काम लोक अपराधों पर अंकुश लगाना होता है। जिससे लोग आतंकित न महसूस करें। हत्या, डकैती, अपहरण, दुष्कृत्य, गैंगरेप जैसे जघन्य अपराधों पर अंकुश लगाया जा सके। इस ओर वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों द्वारा विशेष ध्यान देने के लिए निर्देशित किया गया है, किंतु पुलिस इस काम को भूलकर रेत कारोबारियों के पीछे घूमती दिखती है। पुलिस की अनदेखी के चलते महिलाओं का अपहरण व गुमशुदगी थमने का नाम नहीं ले रही है।

कोतवाली क्षेत्र से सबसे ज्यादा गायब हुई लड़कियां

जिले में सिटी कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत विशेष तौर से शहर में रहने वाली लड़कियां सबसे ज्यादा गायब हुई हैं। जिले के दस थानों के बीच में 145 लड़कियों के गायब होने का आंकड़ा पुलिस विभाग के पास है, जिसमें से अकेले सिटी कोतवाली क्षेत्र से 50 से ज्यादा लड़कियां एक जनवरी से 31 दिसंबर के मध्य गायब हुई हैं।

मुस्कान कार्यक्रम फेल

शासन द्वारा नाबालिक लड़कियों को संदिग्ध स्थितियों में पाए जाने, आर्थिक स्थितियों के कारण घर से बिछुड़ जाने के उद्देश्य से मुस्कान योजना चालू की गई थी, जिसमें पुलिस विभाग के साथ महिला बाल विकास विभाग की जिम्मेदारी तय की गई थी, किंतु मुस्कान योजना भी अपने से बिछड़े माता-पिता के चेहरे पर मुस्कान नहीं दे पाई।

महिलाओं से संबंधित अपराधों की रोकथाम की दिशा में भरपूर प्रयास किए जा रहे हैं। समय-समय पर जागरुकता अभियान चलाकर महिलाओं को कानून की जानकारी दी जा रही है। जो महिलाएं गुमशुदा हुई हैं, उनकी तलाश के लिए अभियान चलाया जा रहा है।
अंजुलता पटले, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक

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